
[Verse 1] कंधों पे धूप के टुकड़े तेरे बालों में उलझे रहे चाय ठंडी बातें गरम थीं हँसते-हँसते दिन फिसल गया [Chorus] दो पल का मौसम था फिर भी दिल ने याद किया जो कहा नहीं वो सबसे ज़्यादा चुप रह कर भी बोल गया दो पल का मौसम था पर उम्र भर सा लग गया [Verse 2] फ़ुटपाथ पे रखे वो जूते भीग गए थे हम नहीं बारिश में तुमने जो देखा वो मैं था या तुम ही थी [Chorus] दो पल का मौसम था फिर भी दिल ने याद किया जो कहा नहीं वो सबसे ज़्यादा चुप रह कर भी बोल गया दो पल का मौसम था पर उम्र भर सा लग गया [Bridge] अब जब भी बादल घिरते हैं खिड़की पे नाम उभरते हैं (ओ ओ) हम थे बस राह के मुसाफ़िर किस मोड़ पे साथ बिखरते हैं [Chorus] दो पल का मौसम था फिर भी दिल ने याद किया जो कहा नहीं वो सबसे ज़्यादा चुप रह कर भी बोल गया दो पल का मौसम था पर उम्र भर सा लग गया

