
### [प्रस्तावना – शांत भक्तिमय आलाप] **गायक:** राम... राम... राम... श्री राम... श्री राम... सरयू की लहरों में, तेरा ही नाम सुनाई दे... अवध की पावन माटी से, तेरी ही खुशबू आए... --- ### [स्थायी / मुख्य Chorus] हर साँस में श्रीराम बसे, हर धड़कन में श्रीधाम बसे, नैना जो खोलूँ मैं प्रभु, बस आपका ही नाम दिखे। मेरे रोम-रोम में राम बसे, मेरे कण-कण में श्रीराम बसे, जीवन की हर एक राह में, प्रभु आपका ही धाम बसे। **जय श्रीराम... जय श्रीराम...** **जय श्रीराम... जय श्रीराम...** --- ### [अंतरा 1] जैसे नदिया में बहता जल, वैसे ही मन में तेरा पल-पल। ना मोह की चिंता, ना दुनिया की आस, जब प्रभुवर हो तुम मेरे पास। अँधियारा चाहे घेर ले, मन में दीप तुम्हारा जले, छाया है उजियारा जग में, जबसे राम का नाम जपे। मेरी आँखों का सपना राम, मेरी साँसों का अपना राम, जीवन मेरा अर्पण तुमको, तुम ही मेरा सच्चा धाम। **मेरे रोम-रोम में राम बसे, मेरे कण-कण में श्रीराम बसे।** --- ### [अंतरा 2] केवट के तारनहार तुम, दीनों के आधार तुम। सब दुख-दर्द मिटाते हो, भक्तों को गले लगाते हो। शबरी के बेरों में प्रभु, भक्ति का स्वाद तुम्हीं ने पाया, प्रेम जहाँ सच्चा होता है, वहाँ स्वयं तुमने रूप दिखाया। जो भी सुमिरे श्रद्धा से, उसके मन में राम बसे, जिसने सौंप दिया खुद को तुमको, उसके हर अरमान बसे। **मेरे रोम-रोम में राम बसे, मेरे कण-कण में श्रीराम बसे।** --- ### [अंतरा 3 – रामचरित भाव] दशरथ के राजदुलारे तुम, कौशल्या के प्यारे तुम, सत्य की राह दिखाने वाले, मर्यादा के रखवाले तुम। वन की राह भी स्वीकार करी, पिता की आज्ञा रख ली तुमने, राजमहल को छोड़ दिया पर, धर्म की ज्योति रख ली तुमने। तेरे चरणों की धूल मिले तो, जीवन मेरा धन्य बने, राम नाम की छाँव मिले तो, हर दुख मेरा शांत बने। --- ### [अंतरा 4 – सीता-राम भाव] सीता के तुम प्राण प्रभु, प्रेम के सच्चे मान प्रभु, जन-जन के तुम राम प्रभु, सबके पालनहार प्रभु। जनकसुता संग जब तुम आए, फूलों से सज गया संसार, प्रेम, त्याग और सत्य की गाथा, बन गई जग में अमर मिसाल। सीता-राम का नाम जो बोले, उसके मन में प्रेम जगे, जहाँ बसे श्री सीताराम, वहीं सारा सुख-धाम बसे। **सीताराम... सीताराम...** **जय जय श्री सीताराम...** --- ### [अंतरा 5 – संकटमोचन भाव] जब-जब संकट घोर हुआ, नाम तुम्हारा साथ रहा, टूटी नैया डूब रही थी, राम नाम ही हाथ रहा। पवनसुत ने जब नाम पुकारा, सागर भी छोटा हो गया, राम काज में जिसने जीवन दिया, वो जग में अमर हो गया। हनुमत के हर रोम में राम, हर मन में तेरा धाम बसे, जो बोले प्रेम से राम-राम, उसके जीवन में राम बसे। **बोलो पवनसुत हनुमान की—जय!** **जय श्रीराम!** --- ### [भक्ति ब्रिज – धीमा और भावपूर्ण] ना धन माँगूँ, ना मैं मान माँगूँ, ना जग से कोई सम्मान माँगूँ, बस इतना वरदान प्रभु, जब अंतिम साँस चले... मेरी जिह्वा पर राम रहें, मेरे हृदय में राम रहें, मेरी आँखों के अंतिम दर्शन, बस श्रीराम के धाम रहें। --- ### [अंतिम स्थायी – भव्य कोरस] हर साँस में श्रीराम बसे, हर धड़कन में श्रीधाम बसे, नैना जो खोलूँ मैं प्रभु, बस आपका ही नाम दिखे। मेरे रोम-रोम में राम बसे, मेरे कण-कण में श्रीराम बसे, जीवन की हर एक धड़कन में, रघुनंदन का नाम बसे। अवध में राम... मन में राम... हर घर में श्रीराम... **मेरे रोम-रोम में राम बसे, मेरे कण-कण में श्रीराम बसे!** **जय श्रीराम! जय श्रीराम! जय श्रीराम!** ### [Outro – मंदिर घंटियाँ + सामूहिक जाप] **कोरस:** राम... राम... राम... श्री राम... श्री राम... **सभी:** **श्रीराम जय राम जय जय राम...** **श्रीराम जय राम जय जय राम...** **जय श्रीराम!**

