
[Intro] [सरोद की तरह नरम आलाप बाँसुरी की मीठी तान] [Verse 1] पुरवा की चुप हवाओं में तुम्हारा नाम झनकता है जैसे मीठा सा कोई सुर मन के भीतर तनकता है (ओ रे) [Verse 2] धूप झरे छन-छन आँगन में पायल-सी तुम हँस जाती हो मेरी सूनी दोपहरों में रंगों की लौ बन जाती हो [Chorus] साँसों में बसे हो चले आओ दिल की दहलीज़ पे बैठ जाओ मैं तुमको ही गाऊँ तुम मुझको एक ही राग में खो जाओ [Verse 3] (स्त्री स्वर) पीले पत्ते फीकी चादर फिर भी मौसम ख़ुशबू सा तुम जो छू लो थोड़ी पलकों से बिखरे मन में उजला सा [Verse 4] (पुरुष स्वर) सूखे होठों पर भी तुम बरखा की पहली बूँद बने तेरे मेरे बीच जो चुप है वही सबसे सच्चे गीत बने (ओ जान) [Chorus] साँसों में बसे हो चले आओ दिल की दहलीज़ पे बैठ जाओ मैं तुमको ही गाऊँ तुम मुझको एक ही राग में खो जाओ [Bridge] (जुगलबंदी) तुम कहो "सजना" मैं कहूँ "सजनी" एक ही धड़कन दो कहानी तुम हो प्रार्थना मैं हूँ वाणी मिलकर बन जाए एक रवानी (ओ मन) [Chorus] साँसों में बसे हो चले आओ दिल की दहलीज़ पे बैठ जाओ मैं तुमको ही गाऊँ तुम मुझको एक ही राग में खो जाओ (हो जाओ) [Outro] [धीमी बाँसुरी की तान सितार की उतरती हुई मींड]

