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जय जगदंबे माँ

[Shlok: Male] या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ [Female Chorus: Soft Temple Harmony] जय अंबे, जगदम्बे माता, जय-जय भवानी माँ। नवदुर्गा स्वरूप निराले, कर दो सबका कल्याण माँ॥ [Interlude: Slow Flute & Sitar] [Alaap: Female Lead] "आ... आ... ए... ओ... जय अम्बे... जय अम्बे... माँ...!" [Interlude: Slow Flute & Sitar] [Sargam: SITAR ONLY] सा रे ग, रे ग म, ग म प, प ध नि सा। सा नि ध प, म ग रे सा। रे ग म प, ध प म ग। सा रे ग म प ध नि सा॥ [Sthayi: Garba Chorus] [Chorus: Male + Female Together] हालो! हालो! रे...गरबा रमवा रे... घंटा बाजे... ढोल बाजे... नव रूपे आवी माँ जगदंबा... नगाड़ा गूँजे... ढोल बजे... प्रेम थी गाइए जयकार रे... जय अंबे...जय जगदम्बे अम्बे माँ... [Verse 1: Male Lead] पहली रात शैलपुत्री आई, हिमगिरि की बेटी भवानी। नंदी पर बैठी तेज अपार, भर दे जीवन में खुशहाली॥ [Chorus] शैलपुत्री माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 2: Female Lead] दूसरी रात ब्रह्मचारिणी, तप की ज्योति जगमग लाई। हाथ कमंडल, हाथ जपमाला, भक्ति की राह दिखाई॥ [Chorus] ब्रह्मचारिणी माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 3: Male Lead] माथे शोभे चंद्र की घंटा, सिंह सवारी वीर निराली। रण में दुष्टों का संहार करे, भक्तों की रखवाली॥ [Chorus] चंद्रघंटा माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 4: Male Lead] चौथी रात कूष्माण्डा आई, ब्रह्माण्ड ज्योति फैलाने वाली। हँसकर सृष्टि रचने वाली, सुख-समृद्धि देने वाली॥ [Chorus] कूष्माण्डा माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 5: Male Lead] पाँचमी रात स्कंदमाता, गोद में कार्तिकेय ललना। ममता बरसे अमृत जैसी, भर दे घर-घर उजियारा॥ [Chorus] स्कंदमाता की जय... जय अंबे माँ... [Verse 6: Male Lead] छठी रात कात्यायनी आई, सिंह पर बैठी रणरागिनी। दुष्ट दलन कर रक्षा करती, वीर शक्ति भवानी॥ [Chorus] कात्यायनी माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 7: Male Lead] सातवीं रात कालरात्रि आई, अंधकार हरने वाली। भय मिट जाए, रोग हट जाए, रक्षा करती काली॥ [Chorus] कालरात्रि माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 8: Male Lead] आठवीं रात महागौरी आई, चाँद सी निर्मल छवि न्यारी। श्वेत कमल सी शोभा उनकी, कृपा बरसावे भारी॥ [Chorus] महागौरी माँ की जय... जय अंबे माँ... [Verse 9: Male Lead] नवमी रात सिद्धिदात्री आई, सिद्धि बुद्धि देने वाली। नवदुर्गा का पूर्ण स्वरूप, “भव्य-हितेश” की बिगड़ी बनाने वाली॥ [Chorus] सिद्धिदात्री माँ की जय... जय अंबे माँ... [Grand Chorus] जय अंबे... जय अंबे... जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। नवदुर्गा माता रानी, भर दो झोली हमारी॥ जग में मंगल, घर में मंगल, मन में मंगलकारी। जय अंबे... जय अंबे... जय जगदम्बे माँ॥