दिल बहलाने के लिए तुमसे दिल की बात आख़िर हम कहें तो क्या कहें, तुम बिन अपने दिल की हालत हम कहें तो क्या कहें। तेरी नज़रें जब मिलीं, तक़दीर मेरी सँवर गई, दिल में उतरी जो नई दुनिया, उसे अब क्या कहें। तूने हमको इस क़दर चाहा कि कोई हद नहीं, तुझसे बढ़कर इस जहाँ में और कोई क्या कहें। इश्क़ की ऊँची उड़ानों का हुनर तुमने दिया, राह में तुमने जलाया जो दिया, उसको क्या कहें। पहली ही उस मुलाक़ात में सादगी तेरी मिली, दिल पे जो छाया था उसका हम असर अब क्या कहें। तेरी मीठी गुफ़्तगू ने इस क़दर मदहोश किया, दिल में उठती उस मोहब्बत की लहर को क्या कहें। एक हल्की-सी हँसी ने कर दिया ऐसा कमाल, दिल ने माना तुमको अपना हमसफ़र, अब क्या कहें। पहली अपनी रात का मंज़र भी क्या मंज़र रहा, चाँद था, तारों की महफ़िल थी, समाँ क्या कहें। चाँद भी ख़ामोश होकर देखता हमको रहा, रात ठहरी थी वहीं, उस रात को अब क्या कहें। तेरी बाँहों में जो आए, दिल को मंज़िल मिल गई, उस घड़ी हमको मिली जो ज़िंदगी, अब क्या कहें। तुझसे ही आग़ाज़ था इस इश्क़ के हर एक सफ़र, तुझ पे आकर रुक गया दिल का सफ़र, अब क्या कहें। तेरे मिलने से मुकम्मल हो गई दुनिया मेरी, तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मुक़द्दर—क्या कहें।