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माँ तुम बहुत रुलाती हो

(स्थायी - Chorus) माँ तुम बहुत रुलाती हो... कभी याद बनकर, कभी प्रेम बनकर, रुलाती हो! माँ तुम बहुत रुलाती हो... (अंतरा १) ईश्वर की स्तुति बनकर, भाव में भक्ति बुनकर, आप आती हो, रुलाती हो। कभी कृष्ण का प्रेम बन कर, कभी राधा जी, कभी शीतला... भगवती बन आती हो। माँ तुम बहुत रुलाती हो... (अंतरा २) कैसे, कहाँ ढूँढू तुझे मैं? गौ माता के चरणों में, या माता तुम्हारी चरणों में! कहाँ पाऊँ - तुझे बता माँ? तू याद बहुत ही आती हो। माँ तुम बहुत रुलाती हो... (अंतरा ३) कभी एकांत के क्षण में, अचानक पास आती हो। अदृश्य एक स्पर्श से, मेरे सिर को सहलाती हो। साक्षात मेरी 'लक्ष्मी' बन कर, हृदय में बस जाती हो। माँ तुम बहुत रुलाती हो... (अंतरा ४) ना दूर हो मुझसे कहीं, मेरे हर श्वास में हो तुम। मेरे विश्वास, मेरी आस, मेरे अहसास में हो तुम। मौन होकर भी मुझे, सच्ची भक्ति की राह दिखाती हो। माँ तुम बहुत रुलाती हो... (समापन) माँ तुम बहुत रुलाती हो... कभी याद बनकर, कभी प्रेम बनकर, रुलाती हो! माँ तुम बहुत रुलाती हो...