
(मुखड़ा) पुरुष (कुमार सानू स्टाइल): तेरी नज़रों का ये जो ख़ुमार है, हाँ, मुझे तुमसे ही सच्चा प्यार है... धड़कनों में बस तेरी ही सदा, तू ही मेरी पहली-पहली बहार है! स्त्री (अलका याग्निक स्टाइल): मैंने सपनों में जो देखा था कभी, तू वही दिलकश हसीं दिलदार है... थाम ले बाहें, सिमट आ पास तू, अब तो जीने का तू ही आधार है! दोनों: तेरी चाहत में यूँ हम खो गए... तुम हमारे हुए, हम तुम्हारे हो गए! तेरी चाहत में यूँ हम खो गए... तुम हमारे हुए, हम तुम्हारे हो गए! (अंतरा 1) (संगीत: वायलिन का खूबसूरत पीस और फिर धीमी बांसुरी) स्त्री (अलका याग्निक स्टाइल): चुपके से दिल में समाया है तू, सांसों की खुशबू में छाया है तू... जब भी देखूँ मैं आईना सनम, मुझको हर पल तू ही आया नज़र! पुरुष (कुमार सानू स्टाइल): ज़ुल्फ़ों की छाँव में तेरी मुझे, मिल गया मेरी वफ़ा का शहर... छू लिया तूने जो प्यार से मुझे, हो गया मेरी दुआ में असर! दोनों: तेरी चाहत में यूँ हम खो गए... तुम हमारे हुए, हम तुम्हारे हो गए! (अंतरा 2) (संगीत: गिटार स्ट्रमिंग और सितार की मखमली धुन) पुरुष (कुमार सानू स्टाइल): भीगी हवाएँ हैं, मीठा शबाब है, तू मेरी आँखों में सजा ख़्वाब है... छूट न पाए ये हाथ उम्र भर, तू ही मेरी चाहतों का जवाब है! स्त्री (अलका याग्निक स्टाइल): तेरे बिना तो ये रातें ढले न, दिल का ये चराग़ तन्हा जले न... मंज़िल हमारी हुई एक ही, अब कोई फ़ासला दरमियाँ न रहे! दोनों: तेरी चाहत में यूँ हम खो गए... तुम हमारे हुए, हम तुम्हारे हो गए! तुम हमारे हुए, हम तुम्हारे हो गए...

