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Gazhal. Urdu. Fir Se Hum Jinda Huay Hum!

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V6

[Verse 1] तुमसे जब बिछड़े हम, तुम बिखर गए, हम टूट गए। तुमको जब जाते देखा, हम तो बेजान हो गए। [Verse 2] ख़्वाब तो हमने देखे थे, कभी जुदा न होंगे हम। वादे भी बहुत किए थे, कभी जुदा न होंगे हम। [Verse 3] कमबख़्त कुछ समय ही ऐसा, तुम्हें दूर जाना पड़ा। मगर तुम्हें थी ऐसी जल्दी, हमसे दूर जाना पड़ा। [Verse 4] तुम्हारे बिना घर में रहना, समय बिताना मुश्किल था। तुम्हारी यादों के सहारे, जीना फिर भी मुमकिन था। [Verse 5] ख़्वाबों में हम मिलते थे, सपनों में बातें होती थीं। चिट्ठी जब तुम्हारी आती, आँखें अपनी रोती थीं। [Verse 6] किस हाल में तुम रहते हो, सोच-सोच घबराते थे। तुमसे इतनी दूर रहकर, हर पल तुम्हें बुलाते थे। [Verse 7] इतनी शिद्दत से चाहा था, दूरी हमसे सही न गई। तुम्हारे जाने का था जो ग़म, दिल से उसकी टीस न गई। [Bridge] इंतज़ार की घड़ी हुई पूरी, समय ने फिर करवट बदली। दूरियाँ सारी मिटती गईं, ज़िंदगी फिर से सँवर चली। [Chorus] दूर न किया तुम्हें एक पल, दिल के पास रखा हरदम। जब तुम लौटे पास हमारे, फिर से ज़िंदा हो गए हम। [Outro] जब तुम लौटे पास हमारे, फिर से ज़िंदा हो गए हम।