
Maroon Kameez Lajawab!
उनकी मरून रंग की सलवार में वो निखार था, चेहरे पे जैसे चाँद का पूरा उभार था। गोल-गोल आँखों के वो रौशन झरोखे, हर इक नज़र में प्यार का इक इश्तिहार था। होंठों पे उनके बात कोई ठहर गई, हम पर मगर हुस्न का गहरा ख़ुमार था। जब ये कहा — “ज़रा अपनी कहानी सुनाइए”, “No I am not kidding” में अजब ऐतबार था। तब होश आया, दिल को ज़ुबाँ मिल गई, हर राज़-ए-दिल बयान करना दरकार था। समोसे-कचौरी खाने में उलझे रहे हम, उसकी हँसी में छुपी बहार देख न पाए हम प्याली में चाय क्या थी, मोहब्बत का रंग था, दिल के दर पे जैसे किसी ने पुकारा था। ध्यान कहीं और था मगर दिल उसी पे था, फूलों सा उसका चेहरा अजब दिलफ़िगार था। इक नज़र में देख लिया उसको सरापा हमने, उस वक़्त दिल पे इश्क़ का पहला वार था। अंकल ने हँस के फिर ये इजाज़त अता की थी, “दोनों को अब अकेले में करने दो गुफ़्तगू।” फिर अगले कमरे में ले गए अदब से हम, फैंटा ऑरेंज में भी अजब सा ख़ुमार था। उसकी दिलकश बातों का क्या तज़्किरा करें, हर लफ़्ज़ मोतियों की तरह आबदार था। मुस्कान उसकी रसगुल्लों की चाशनी सी थी, मिठास से भरा हुआ हर इक शिआर था। पीते रहे हम उसके तबस्सुम का वो रस, दिल हर घड़ी मोहब्बत के नश्शे में चूर था।

