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Lakshmi Amritwani Soft

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[Intro] विश्वप्रिया कमलेश्वरी लक्ष्मी दया निधान तिमिर हरो अज्ञान का, ज्ञान का दो वरदान॥ [Verse 1] आठों सिद्धियाँ द्वार तेरे खड़ी हैं माँ कर जोड़, निज भक्तों की लाज को तट की ओर तू मोड़। निर्धन हम लाचार बड़े, तू है धन का कोष, सुख की वर्षा करके माँ, हर लो मन का दोष॥ जीवन चंदा को मैया, ग्रहण लगा घनघोर, डगमग डोले पग हमारे, हम मानव कमजोर॥ [Chorus] जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ [Verse 2] महासुखदाई नाम तेरा, कर कष्टों का अंत, मरुस्थल जैसी ये काया, दे दो इसे बसंत। दिव्य रूप नारायणी, पारस है तेरा धाम, तेरे सुमिरन से होते, संतों के सिद्ध काम॥ स्वर्ण सी तेरी कांति, भय का करती नाश, तेरी करुणा से टूटे, हर जंजाल का पाश॥ [Chorus] जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ [Verse 3] मैया शोक विनाशिनी, ऐसा करो उपकार, जीवन नौका हो जाए, भवसिंधु से पार। शेष की शैया बैठ के, सकल विश्व को देख, तेरी दृष्टि में मैया, हर मस्तक की रेख॥ सिंधु सुता भागेश्वरी, दीजो भाग्य जगाय, त्याग के जग को हम, तेरी शरण गए हैं आय॥ [Chorus] जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ [Verse 4] तू वैकुण्ठ निवासिनी, हम नरकों के जीव, प्राणहीन ये देही कहे, कर दो हमें सजीव। कमला वैभव लक्ष्मी, सुख-सिद्धि तेरे पास, सागर तट पे हम प्यासे, मैया बुझा दो प्यास॥ धन-धान्य से घर हमारे, सदा रहे भरपूर, हर्ष के फूल खिलाकर, काँटे कर दो दूर॥ [Chorus] जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ [Verse 5] तेरी अलौकिक माया से, भागे दुःख संताप, रोम-रोम माँ करे तेरा, मंगलमय जाप। हरि की है अर्धांगिनी, कृपा की दृष्टि कर, अन्न-धन-संपत्ति से माँ, भरा रहे ये घर॥ सागर मंथन से प्रकटी, ज्योति अपरम्पार, मन से चिंतन हम करें, सबकी चिंता हार॥ [Outro] जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता॥