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म्हारो रामपुरा कल्ला

🎵 "दूध की डेयरी से दिल तक" 🎵 (Verse 1) सुबह की वो हल्की धूप थी, हाथों में खाली कैन, दूध की उस छोटी डेयरी पर, मिल गया मेरा चैन। ना नाम पता, ना कोई बात, बस नज़रों का था सिलसिला, किसे पता था एक मुस्कान, बदल देगी ये फ़ासला। (Pre-Chorus) रोज़ वहीं मिलने का बहाना, दिल ने चुपके से उसे अपना माना... (Chorus) तू डेयरी वाली वो पहली सुबह, आज मेरी हर शाम का सुकून है। जो कभी बस एक अजनबी थी, आज मेरी ज़िंदगी का जुनून है। रब ने लिखी थी कैसी कहानी, मुलाक़ातों से बन गई ज़िंदगानी, तेरे बिना अब कुछ भी नहीं, तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरी निशानी। (Verse 2) वो दूध के डिब्बे, वो छोटी-सी लाइन, तेरा मुस्कुराकर कहना, "आज फिर टाइम?" बातों-बातों में दिल जुड़ गया, सपनों का हर रंग निखर गया। (Bridge) आज भी जब उस डेयरी के पास से गुज़रता हूँ, हर कोना तेरी पहली मुस्कान याद दिलाता है। वहीं से शुरू हुआ था सफ़र, और आज तू मेरी पूरी दुनिया कहलाती है। (Final Chorus) तेरे संग हर मौसम अपना है, हर सपना अब सच लगता है। दूध की डेयरी पर जो कहानी शुरू हुई थी, वो आज मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत गीत बन गई है। ❤️