
मुखड़ा: कान्हा होली खेल रहे, राधा की बहकी चाल। संग जोड़ लिया गोपियां, कान्हा हुए बेहाल। बुरा न मानो होली है....... अंतरा 1: पकड़ हाथ में पिचकारी, राधा ने रंग डारा। भीग गई सब कामरी, कान्हा ने मन हारा। मुख पर मल दिया गुलाल, कर दिया लालम-लाल। संग जोड़ लिया गोपियां, कान्हा हुए बेहाल। बुरा न मानो होली है....... अंतरा 2: इधर सखी, उधर सखी, बीच फँसे बनवारी। हार गए नटवर आज, जीतीं सब ब्रज-नारी। बजता मृदंग और ताल, मची है धूम विशाल। संग जोड़ लिया गोपियां, कान्हा हुए बेहाल। बुरा न मानो होली है....... समापन: बरसाने की लाड़ली, खेले फाग अनूप। रंगों में है डूब गया, साँवरिया का रूप। झूमे सारा नंदलाल, भूल गया सब हाल। संग जोड़ लिया गोपियां, कान्हा हुए बेहाल। बुरा न मानो होली है.......

