
आऽऽऽऽऽ… रेऽऽऽ… गाऽऽऽ… माऽऽऽ… पाऽऽऽ… धाऽऽऽ… नीऽऽऽ… साऽऽऽऽऽ! आऽऽ रे रे रे… गा मा गा रे सा… आऽऽऽऽऽ… नी सा रेऽऽऽ! रे गा मा पाऽऽऽ! मा गा रे साऽऽऽ! [Verse 1] रात जली, आकाश झुका, धरती ने अंगार उगला। मेरे भीतर जागी ज्वाला, अब न बचेगा कोई ताला। रे गा मा— मा पा धा— धा नी साऽऽऽ! अग्नि उठे! अग्नि बढ़े! अग्नि सब कुछ निगल चले! जलने दो संसार को, टूटने दो हर दीवार को। मेरी नसों में आग बहे, आज विनाश का राग बजे! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग बजे! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग बजे! धा धिन धिन धा! धा धिन धिन धा! धा तिन तिन ता! ता धिन धिन धा! काल चला मेरे संग-संग, राख हुई हर एक उमंग। बिजली फटती मेरी सांसों में, मृत्यु नाचे इन राहों में। सा रे गा मा पा! मा पा धा नी सा! साऽऽऽऽऽ! सा नी धा पा मा! पा मा गा रे सा! साऽऽऽऽऽ! रे गा मा— मा पा धा— धा नी साऽऽऽ! अग्नि उठे! अग्नि बढ़े! अग्नि सब कुछ निगल चले! जलने दो संसार को, टूटने दो हर दीवार को। मेरी नसों में आग बहे, आज विनाश का राग बजे! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग बजे! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग बजे! शून्य से मैं जन्मा था… शून्य में लौट जाऊँगा… पर जब तक सांस रहे— आऽऽऽऽऽऽऽऽऽ! मैं अग्नि बन जाऊँगा! अग्नि! राख! मृत्यु! विनाश! धा! धा! धा-धा-धा! विनाश का— राऽऽऽऽऽऽऽग! सा रे गा रे सा! रे गा मा गा रे! गा मा पा मा गा! मा पा धा पा मा! पा धा नी धा पा! धा नी सा नी धा! साऽऽऽऽऽऽऽऽऽ! जलने दो संसार को, टूटने दो हर दीवार को। मेरी नसों में आग बहे, आज विनाश का राग बजे! जलने दो! टूटने दो! राख में सब मिलने दो! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग बजे! आऽऽऽऽऽ! विनाश का राग— बजेऽऽऽऽऽऽऽऽ! सा… नी… धा… पा… मा… गा… रे… सा…

