
जय जय माँ महालक्ष्मी (मौलिक भक्ति-गीत) मुखड़ा जय जय माँ महालक्ष्मी, कर दो जीवन धन्य। तेरी कृपा बरसे मैया, भर दो खुशियों का धाम॥ अंतरा 1 कमलासन पर विराजी माता, हाथों में शुभ कमल सुहाता। स्वर्ण किरण-सी तेरी आभा, हर ले मन की हर व्यथा॥ मुखड़ा जय जय माँ महालक्ष्मी, कर दो जीवन धन्य। तेरी कृपा बरसे मैया, भर दो खुशियों का धाम॥ अंतरा 2 जहाँ तेरा पावन वास हो, वहाँ प्रेम और विश्वास हो। सुख-समृद्धि के दीप जलें, हर घर में उल्लास हो॥ ब्रिज श्रीं… श्रीं… श्रीं… तेरा नाम ही मेरा सहारा। श्रीं… श्रीं… श्रीं… तू ही जीवन का उजियारा॥ अंतरा 3 भक्ति का दीप जले हृदय में, सत्य का पथ दिखला देना। ज्ञान, दया और प्रेम की गंगा, जीवन में बहा देना॥ समापन जय जय माँ महालक्ष्मी, रखना सदा दया की छाँव। तेरे चरणों में है अर्पित, मेरा तन, मन और प्राण॥

