
Ik Shaam Hum Baithey Thei!
मेरे दिल में बसता है तू। एक शाम हम बैठे थे यूँ ही, दोस्तों की महफ़िल में। एक दोस्त ने दर्द सुनाया, आँखों की उस हलचल में। बोला, जब मैं टूट रहा था, जब रिश्ता मेरा रूठा था। हमने उससे इतना पूछा, क्या तुम अपना दर्द दबाते हो? अपने दिल की टूटी बातें, सबसे छुपाते हो? उसने बोला, हाँ अक्सर मैं, चुप रहकर सब सहता हूँ। अपने आँसू पी लेता हूँ, सबके आगे हँसता हूँ। हमने कहा, ऐ मेरे दोस्त, पहले अपने ज़ख्म पहचान। दिल पर जितने घाव पड़े हैं, उन सबका भी रख सम्मान। रोना कमजोरी नहीं है, आँसू भी इक भाषा हैं। दर्द दबाने से बढ़ता है, ये जीवन की परिभाषा है। किसी मित्र से बात भी कर, किसी ख़ैरख़्वाह के पास जा। और ज़रूरत हो तो दिल का, हाल किसी उपचारक को बता। फिर हमने उससे यह सवाल किया, क्या तूने इतना सोचा है? जिसको तू बाहर ढूँढ रहा, वो तेरे अंदर बैठा है। तेरे दिल की हर धड़कन में, उसकी अपनी धुन चलती है । तेरी हर इक सच्ची आह पर, उसकी पलकों नमी मचलती है ज़रा सोच, जब तुम रोते हो ऐ दोस्त, ख़ुदा भी रोता होगा। तेरे दर्द की हर आहट पर, दिल उसका भी खोता होगा। नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, तुझमें ही जो रहता है। तेरे ज़ख्मों की हर चुभन को, चुपके-चुपके सहता है। अपने भी इंसान हैं आखिर, उनसे भी ग़लती होती है। कई दफ़ा जो चोट पहुँचाएँ, उनकी अपनी मजबूरी होती है। कभी-कभी जो दर्द मिले तो, उसमें कोई राज़ भी है। टूटे दिल की वीरानी में, रब की कोई आवाज़ भी है। अब जब दुनिया सताती है, दिल उतना घबराता नहीं। क्योंकि मेरा रब मुझसे अब, एक पल भी जाता नहीं। मेरी नाव भी, माझी भी वो, मेरा दरिया, साहिल भी वो। मेरे अंदर, मेरे बाहर, मेरा आख़िर, अव्वल भी वो। कुछ कहते हैं, तू है नहीं, कुछ कहते हैं, हर शै में तू। मैं इतना ही जान गया हूँ, मेरे दिल में बसता है तू। ⸻

